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दिल मर्द ज़ात है, बदमाश बात है
सोचो क्या सोचूँ मैं
सर्दी की रात है, एक आग साथ है
सोचो क्या सोचूँ मैं
तुम लफ़्ज़ों की चिंगारियाँ होंठों से ना छोड़ो
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दिल मर्द ज़ात है, बदमाश बात है
सोचो क्या सोचूँ मैं
सर्दी की रात है, एक आग साथ है
सोचो क्या सोचूँ मैं
तुम लफ़्ज़ों की चिंगारियाँ होंठों से ना छोड़ो
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